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तलाक के मामलों में सलाह और पैरवी

तलाक का फ़ैसला भावनात्मक रूप से कठिन होता है, और इसके साथ भरण-पोषण, बच्चों की कस्टडी और संपत्ति जैसे कानूनी सवाल जुड़े होते हैं। लॉ चैंबर्स ऑफ़ मृदुल जिंदल नोएडा (गौतम बुद्ध नगर), गाजियाबाद और दिल्ली के पारिवारिक न्यायालयों में तलाक के मामले देखता है, चाहे आप तलाक की याचिका दायर करना चाहते हों या आपको याचिका मिली हो।

आपसी सहमति से तलाक

जब पति-पत्नी दोनों अलग होने पर, और गुज़ारा भत्ता, बच्चों की कस्टडी व संपत्ति की शर्तों पर सहमत हों, तो हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13B के तहत संयुक्त याचिका दायर की जा सकती है। इसके लिए दोनों का कम से कम एक वर्ष से अलग रहना ज़रूरी है। पहली याचिका के बाद सामान्यतः छह महीने की प्रतीक्षा अवधि होती है, जिसे उचित मामलों में अदालत माफ़ कर सकती है।

विवादित तलाक (Contested Divorce)

जब एक पक्ष तलाक के लिए तैयार न हो, तो कानून में दिए गए आधारों पर याचिका दायर की जाती है। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के प्रमुख आधार हैं: क्रूरता, कम से कम दो वर्ष से परित्याग (desertion), व्यभिचार, धर्म परिवर्तन और गंभीर मानसिक विकार। ऐसे मामलों में साक्ष्य और गवाही के साथ पूरा मुकदमा चलता है।

अंतर-धार्मिक या विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत हुए विवाहों पर वही अधिनियम लागू होता है, और मुस्लिम, ईसाई व पारसी विवाहों के लिए अलग कानून हैं।

भरण-पोषण, गुज़ारा भत्ता और बच्चों की कस्टडी

  • मुकदमे के दौरान भरण-पोषण (हिंदू विवाह अधिनियम धारा 24) और स्थायी गुज़ारा भत्ता (धारा 25)
  • BNSS की धारा 144 (पहले CrPC धारा 125) के तहत भरण-पोषण
  • घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत राहत
  • बच्चों की कस्टडी और मुलाक़ात के अधिकार, जिनमें अदालत बच्चे के हित को सबसे ऊपर रखती है

तलाक की प्रक्रिया

  1. परामर्श और दस्तावेज़ों की जाँच: विवाह का प्रमाण, पते के प्रमाण, आय से जुड़े दस्तावेज़ और विवाद से जुड़े रिकॉर्ड।
  2. याचिका: याचिका का मसौदा तैयार करना और सही पारिवारिक न्यायालय में दायर करना।
  3. मध्यस्थता और सुलह: अदालत के निर्देश पर मध्यस्थता, जहाँ कई मामले आपसी सहमति से निपट जाते हैं।
  4. साक्ष्य, बहस और डिक्री: विवादित मामलों में गवाही और बहस के बाद अदालत का फ़ैसला।

आपसी सहमति से तलाक के बारे में विस्तार से जानने के लिए हमारा पेज Mutual Consent Divorce Lawyer देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आपसी सहमति से तलाक में कितना समय लगता है?

सामान्यतः पहली याचिका के छह महीने बाद दूसरी याचिका पर सुनवाई होती है। प्रतीक्षा अवधि माफ़ होने पर कम समय भी लग सकता है। कुल समय अदालत की तारीखों पर भी निर्भर करता है।

क्या शादी के एक साल के भीतर तलाक की याचिका दी जा सकती है?

हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 14 के तहत सामान्यतः नहीं। असाधारण कठिनाई या असाधारण दुराचार के मामलों में अदालत की अनुमति से याचिका दायर की जा सकती है।

क्या पति भी गुज़ारा भत्ता माँग सकता है?

हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 और 25 के तहत पति या पत्नी, जिसकी अपनी आय पर्याप्त न हो, भरण-पोषण माँग सकता है।

बच्चे की कस्टडी किसे मिलती है?

अदालत बच्चे के कल्याण को सबसे ऊपर रखती है। बच्चे की उम्र, माता-पिता की देखभाल करने की क्षमता और बड़े बच्चे की इच्छा पर विचार किया जाता है। साझा कस्टडी या मुलाक़ात के अधिकार भी दिए जा सकते हैं।

यह जानकारी सामान्य जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। आपके मामले के तथ्यों के अनुसार सलाह अलग हो सकती है।