WhatsApp या ईमेल से कानूनी नोटिस: क्या यह भारत में मान्य है?

Read this article in English संक्षेप में भारतीय अदालतें अब WhatsApp या ईमेल से भेजे गए कानूनी नोटिस को मान्य तामील मानती हैं, बशर्ते डिलीवरी और प्राप्ति दिखाई जा सके। यह धीमे भौतिक तरीकों से एक बड़ा बदलाव है। पहले नोटिस भौतिक रूप से पहुँचाने पड़ते थे, जिसमें देरी और टालमटोल की गुंजाइश रहती थी।
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छल बनाम आपराधिक न्यासभंग: कब आपराधिक केस नहीं, दीवानी मुकदमा करें (धारा 318 और 316 BNS)

Read this article in English संक्षेप में कौन-सा आपराधिक आरोप लगाना है, यह तय करने से पहले छल और आपराधिक न्यासभंग का अंतर समझना ज़रूरी है। भारतीय दंड संहिता (अब भारतीय न्याय संहिता, BNS) के ये दोनों अपराध बहुत अलग तथ्यों पर टिके हैं, और ग़लत धारा में शिकायत करने के परिणाम भी अलग होते
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दोस्त को नकद उधार दिया और चेक बाउंस हो गया? धारा 138 पर सर्वोच्च न्यायालय के नए नियम (2025)

Read this article in English संक्षेप में क्या किसी दोस्त या रिश्तेदार को नकद उधार देने और फिर चेक बाउंस होने पर आप अदालत में कमज़ोर पड़ जाते हैं? नहीं। सर्वोच्च न्यायालय ने अब साफ़ कर दिया है: जब आरोपी चेक पर हस्ताक्षर स्वीकार कर लेता है, तो कानून मानता है कि चेक किसी असली
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धारा 482 BNSS में अग्रिम जमानत: गिरफ़्तारी से पहले ख़ुद को कैसे बचाएँ

Read this article in English संक्षेप में अगर किसी शिकायत में आपका नाम आया है, या आपको परिवार, पैसे या संपत्ति के विवाद में झूठी FIR का डर है, तो कानून आपको पुलिस के गिरफ़्तार करने से पहले ही अदालत जाने की अनुमति देता है। इस सुरक्षा को अग्रिम जमानत कहते हैं। यह लेख बताता
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