संक्षिप्त उत्तर: बिल्डर ने फ्लैट देने में देरी की
तय तारीख के बाद कब्ज़ा न मिले तो खरीदार ब्याज सहित रिफंड, या कब्ज़े के साथ देरी का मुआवज़ा मांग सकता है। मुख्य मंच उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 का उपभोक्ता आयोग और उत्तर प्रदेश रेरा हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि खरीदार को अनिश्चित काल तक इंतज़ार के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता और दोनों उपाय साथ-साथ उपलब्ध हैं। एक ही राहत दो मंचों में एक साथ न मांगें। मंच चुनने से पहले समझौते की तारीख, किए भुगतान और प्रोजेक्ट की स्थिति देखें।
अंतिम समीक्षा: 1 नवंबर 2026. लेखक: एडवोकेट मृदुल जिंदल, लॉ चेंबर्स ऑफ मृदुल जिंदल, इंदिरापुरम, गाजियाबाद।
उपभोक्ता आयोग या रेरा: कौन सा मंच
| विषय | विवरण |
|---|---|
| राहत | आयोग: रिफंड, ब्याज, मुआवज़ा, खर्च। रेरा: निर्धारित दर से ब्याज सहित रिफंड या देरी का ब्याज |
| समय-सीमा | आयोग: कारण उत्पन्न होने से दो वर्ष; कब्ज़ा न मिलने पर आमतौर पर जारी कारण माना जाता है |
| किसके लिए बेहतर | आयोग: मानसिक पीड़ा का मुआवज़ा, खामियां, पुराने प्रोजेक्ट। रेरा: पंजीकृत प्रोजेक्ट में वैधानिक ब्याज |
| मूल्य सीमा | ज़िला आयोग 50 लाख तक, राज्य आयोग 2 करोड़ तक, उससे ऊपर राष्ट्रीय आयोग; रेरा में कोई सीमा नहीं |
देरी करने वाले बिल्डर के विरुद्ध आपके अधिकार
- ब्याज सहित रिफंड: कब्ज़े की तारीख निकल चुकी और प्रोजेक्ट रुका है तो रिफंड मिल सकता है।
- देरी का मुआवज़ा: इंतज़ार करना चाहें तो देरी का मुआवज़ा।
- एकतरफा शर्तें: बिल्डर को खुली छूट और खरीदार पर भारी ब्याज वाली शर्तें अनुचित मानकर चुनौती दी जा सकती हैं।
- क्षेत्रफल कम या खामियां: कमी की कीमत और मरम्मत का खर्च।
- होम लोन ब्याज: देरी के दौरान प्री-ईएमआई या ईएमआई का ब्याज उचित मामलों में।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख फैसले: पायनियर अर्बन लैंड बनाम गोविंदन राघवन (2019), आरिफुर रहमान खान बनाम डीएलएफ सदर्न होम्स (2020), इम्पीरिया स्ट्रक्चर्स बनाम अनिल पटनी (2020), न्यूटेक प्रमोटर्स बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2021)।
हमारी प्रक्रिया
1. बिल्डर-खरीदार समझौता, आवंटन पत्र, रसीदें, मांग पत्र और ईमेल जुटाना। 2. बिल्डर को कानूनी नोटिस। 3. उपभोक्ता आयोग (ई-जागृति पोर्टल) या यूपी-रेरा में शिकायत। 4. आदेश के बाद वसूली, ज़रूरत पर संपत्ति कुर्की। बिल्डर दिवालिया हो तो आवंटी वित्तीय ऋणदाता के रूप में दावा कर सकते हैं।
फ्लैट नहीं मिला?
समझौता, रसीदें और प्रोजेक्ट की ताज़ा फोटो लेकर आएं। हम मंच, संभावित राहत और समय-सीमा बताएंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जमा राशि पर ब्याज सहित रिफंड, या कब्ज़े के साथ देरी का मुआवज़ा, और उचित मामलों में मानसिक पीड़ा का मुआवज़ा व मुकदमे का खर्च।
दोनों खुले हैं। आयोग में व्यापक मुआवज़ा और पुराने प्रोजेक्ट, रेरा में पंजीकृत प्रोजेक्ट पर वैधानिक ब्याज। एक ही राहत दोनों में एक साथ न मांगें।
उपभोक्ता कानून में कारण उत्पन्न होने से दो वर्ष, और कब्ज़ा न मिलने पर आमतौर पर जारी कारण माना जाता है। फिर भी जल्दी करें।
हां। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार खरीदार को अनिश्चित काल तक इंतज़ार के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
बहुत सीमित बचाव है, केवल यदि समझौते और तारीखें इसका समर्थन करें। पहले से शुरू हुई देरी माफ नहीं होती।
यूपी-रेरा की वेबसाइट पर जांचें। अपंजीकृत प्रोजेक्ट अपने आप में उल्लंघन है।
आवंटी दिवाला कानून में वित्तीय ऋणदाता माने जाते हैं और दावा दाखिल कर सकते हैं। हम दावे और डिक्री के विकल्प पर सलाह देते हैं।
कानूनी आधार
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019, धाराएं 2, 34, 47, 58, 69
- रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016, धाराएं 18 और 31
- सुप्रीम कोर्ट: पायनियर अर्बन लैंड (2019), आरिफुर रहमान खान (2020), इम्पीरिया स्ट्रक्चर्स (2020), न्यूटेक प्रमोटर्स (2021)
यह पृष्ठ सामान्य जानकारी है, आपके मामले की कानूनी सलाह नहीं। अंतिम समीक्षा 1 नवंबर 2026.
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