संक्षिप्त उत्तर: सुप्रीम कोर्ट वकील
एडवोकेट मृदुल जिंदल (लॉ चैंबर्स ऑफ़ मृदुल जिंदल) 2021 से बार काउंसिल ऑफ़ दिल्ली में नामांकित हैं, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य हैं, और भारत के किसी भी राज्य के क्लाइंट के सुप्रीम कोर्ट केस देखते हैं: हाई कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ स्पेशल लीव पिटीशन (SLP), ज़मानत और आपराधिक अपील, ट्रांसफ़र याचिका, अनुच्छेद 32 रिट और जनहित याचिका (PIL)। काग़ज़ ईमेल या WhatsApp पर भेजे जा सकते हैं, इसलिए शुरुआत के लिए दिल्ली आना ज़रूरी नहीं। कॉल करें: +91-8800669834।
लेखन व समीक्षा: एडवोकेट मृदुल जिंदल, बार काउंसिल ऑफ़ दिल्ली में नामांकित (2021) · अंतिम अपडेट 2 Nov 2026
मुख्य तथ्य
- अदालत: सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया, तिलक मार्ग, नई दिल्ली
- मामले: SLP (अनुच्छेद 136), ज़मानत व आपराधिक अपील, दीवानी व वैवाहिक ट्रांसफ़र याचिका, अनुच्छेद 32 रिट, PIL
- क्लाइंट: भारत के किसी भी राज्य से, और NRI
- नामांकन: बार काउंसिल ऑफ़ दिल्ली, D/3547/2021; सदस्य, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन
- फ़ोन और WhatsApp: +91-8800669834
किसी भी राज्य के क्लाइंट के लिए सुप्रीम कोर्ट वकील
सुप्रीम कोर्ट सिर्फ़ नई दिल्ली में बैठता है, लेकिन उसके केस हर राज्य से आते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, राजस्थान या विदेश में रहने वाला व्यक्ति घर बैठे हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दे सकता है, ज़मानत माँग सकता है या केस दूसरे राज्य में ट्रांसफ़र करवा सकता है। चैंबर काग़ज़ देखकर बताता है कि सुप्रीम कोर्ट जाना ठीक है या नहीं, याचिका तैयार करता है और सुनवाई में पेश होता है।
सुप्रीम कोर्ट नियम, 2013 के तहत सुप्रीम कोर्ट में केस केवल एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के ज़रिए दायर हो सकता है। चैंबर केस तैयार करता है और दायर करने के लिए एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के साथ काम करता है, ताकि शुरू से अंत तक आपका संपर्क एक ही वकील से रहे।
कौन से केस सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं?
- स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) — अनुच्छेद 136 के तहत, हाई कोर्ट के फ़ैसले या आदेश के ख़िलाफ़
- ज़मानत और आपराधिक अपील — जब हाई कोर्ट ज़मानत या अग्रिम ज़मानत ठुकरा दे या सज़ा बरक़रार रखे
- ट्रांसफ़र याचिका — केस को एक राज्य की अदालत से दूसरे राज्य में भेजने के लिए
- वैवाहिक ट्रांसफ़र याचिका — तलाक़, गुज़ारा भत्ता या कस्टडी केस को ट्रांसफ़र कराने के लिए
- अनुच्छेद 32 रिट याचिका — मौलिक अधिकारों के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट
- जनहित याचिका (PIL) — आम जनता को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर
सुप्रीम कोर्ट में केस कैसे चलता है
1. काग़ज़ों की जाँच। हाई कोर्ट का फ़ैसला और निचली अदालतों के आदेश भेजें। चैंबर देखता है कि सुप्रीम कोर्ट के दख़ल का ठोस क़ानूनी आधार है या नहीं, और न हो तो साफ़ बताता है।
2. समय सीमा। SLP आमतौर पर हाई कोर्ट के फ़ैसले के 90 दिन के भीतर दायर होनी चाहिए। देरी होने पर देरी माफ़ी (condonation of delay) का आवेदन कारण बताते हुए लगाना होता है।
3. पहली सुनवाई। पहली सुनवाई में कोर्ट या तो याचिका ख़ारिज करता है या दूसरे पक्ष को नोटिस जारी करता है। इसी चरण पर स्टे या गिरफ़्तारी से सुरक्षा जैसी अंतरिम राहत भी मिल सकती है।
यह पेज सामान्य जानकारी देता है, यह क़ानूनी सलाह नहीं है। कोई क़दम उठाने से पहले वकील से बात करें।
आधिकारिक स्रोत: सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया · भारत का संविधान (अनुच्छेद 32 और 136)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
हाँ। सुप्रीम कोर्ट पूरे भारत के केस सुनता है। आप काग़ज़ ईमेल या WhatsApp पर भेज सकते हैं, फ़ोन पर बात कर सकते हैं, और नई दिल्ली में सुनवाई पर वकील आपकी ओर से पेश होते हैं।
SLP आमतौर पर हाई कोर्ट के फ़ैसले के 90 दिन के भीतर दायर होनी चाहिए। समय निकल जाने पर भी देरी माफ़ी के आवेदन के साथ याचिका दायर हो सकती है, लेकिन देरी का ठोस कारण बताना होगा।
सुप्रीम कोर्ट नियम, 2013 के तहत केस केवल एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के ज़रिए दायर होता है। लॉ चैंबर्स ऑफ़ मृदुल जिंदल केस तैयार करता है, दायर करने के लिए एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के साथ काम करता है और सुनवाई में पेश होता है।
हाँ। याचिका पर नोटिस जारी करते समय सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट के आदेश पर स्टे, गिरफ़्तारी से सुरक्षा या यथास्थिति बनाए रखने जैसी अंतरिम राहत दे सकता है।
आमतौर पर नहीं। सुनवाई में वकील आपकी ओर से पेश होते हैं। हलफ़नामा और वकालतनामा जैसे दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर बिना दिल्ली आए भी हो सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट वकील चाहिए?
हाई कोर्ट का आदेश WhatsApp पर भेजें या कॉल करें, ताकि पता चले कि आपका केस सुप्रीम कोर्ट जा सकता है या नहीं।
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